यहां जानिये, भगवान राम की ससुराल मिथिला में क्या चल रहा है

सैकड़ों वर्ष के चले आ रहे संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को होने वाले भूमिपूजन से देश-विदेश के सनातनी धर्मावलंबियों में खुशी का माहौल है...

यहां जानिये, भगवान राम की ससुराल मिथिला में क्या चल रहा है
भगवान राम की ससुराल मिथिला

बेगूसराय

लेकिन सबसे अधिक मिथिलावासियों को गर्व है कि लंबे संघर्ष के बाद उनके पाहुन (दामाद) का अद्वितीय मंदिर बनने जा रहा है। मिथिला के लोग अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए कई वर्षों से जप-तप और हवन कर रहे थे। अब जाकर उसकी सिद्धि हुई और श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण कार्य शुरू हो रहा है, साथ में मिथिला की बेटी जनक नंदिनी सीता भी विराजमान होगी।

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अयोध्या में श्रीराम का मंदिर बने इसके लिए मिथिला की दक्षिणी सीमा पर स्थित सिमरियाधाम गंगा तट पर सर्वमंगला परिवार द्वारा 2008 से ही अनवरत अनंत श्री कोटी अंबा हवनात्मक यज्ञ चल रहा है। इस यज्ञ में संकल्प के साथ मिथिला वासी रोज लाखों आहुतियां दे रहे हैं, अबतक 14 करोड़ से ऊपर आहुति पड़ चुकी है। मंदिर निर्माण के लिए यहां से गंगाजल, मिट्टी, श्रीयंत्र और वास्तु यंत्र भी अयोध्या पहुंच चुके हैं। सर्वमंगला सिद्धाश्रम के संस्थापक स्वामी चिदात्मन जी कहते हैं कि पांच सौ बरस तक कलयुग रहने के कारण यह सत्य प्राप्त करने में समय लगा। इस दौरान जिन पुण्यात्माओं ने भी तन-मन और धन की आहुति दी, वह जन्म—जन्मांतर की पुण्य आत्माएं हैं।

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देश में कोई भी बड़ा स्थान प्राप्त करता है तो वह पुण्यात्मा है, जमीन से उठकर देश के सर्वोच्च स्थान को प्राप्त करने वाले नरेन्द्र मोदी आदर्श चरित्र और पुण्यात्मा हैं। जिनके समय में भारतवासी अपने अतीत के गौरव को प्राप्त करने के लिए अग्रसर हैं, यह बड़ी बात है। आजादी के बाद 70 साल तक अपने सामान को लोग अपना नहीं कह पाते थे। जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो गर्व से कह रहे हैं कि यह हमारा है और भारत अपने अधिकार को प्राप्त कर रहा है, हम अपनी गौरवशाली अतीत का गर्व से चर्चा कर रहे हैं। 135 करोड़ से ऊपर की आबादी में भारतीयता का गर्व करने वाले विशेष अनुभव कर रहे हैं।

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कल्पना में नहीं था कि इतनी कुर्बानी देने के बाद भी अयोध्या में मंदिर बनेगा, अब भूमि पूजन होकर मंदिर बन रहा है तो यह अब मंदिर सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, संपूर्ण विश्व के लिए एक उदाहरण बनेगा। हम साधु समाज अपने अतीत के गौरव को प्राप्त करने पर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। भगवान श्रीराम कहीं स्थापित होंगे, लेकिन ये मिथिला के कण-कण में व्याप्त हैं, उन्होंने माता सीता को वचन दिया था कि मिथिला से कभी अलग नहीं होंगे। यहां सिमरिया धाम में सर्वमंगला परिवार के नेतृत्व में 2008 से लगातार आहुति पड़ रही है। भारत की एकता और महानता का यह सूत्र वैदिक युग से प्रमाणित है। भूमि पूजन के मौके पर विशेष आहुति के साथ घी केेे दीये भी जलाये जायेंगे।

(हिन्दुस्थान समाचार)