चीनी राखी से सस्ती हैं सेवा भारती की राखियां

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन सेवा भारती ने रक्षाबंधन पर्व पर लोगों से चीन में बनी राखियों के उपयोग का बहिष्कार करने और केवल स्वदेशी राखियों को खरीदने का आह्वान किया है...

चीनी राखी से सस्ती हैं सेवा भारती की राखियां

नई दिल्ली

इसके लिए संगठन ने पूरे  भारत में स्वदेशी राखियां बनवाने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने की मुहिम चलाई हुई है। इसके अंतर्गत संगठन कार्यकर्ता राखी बनाने में उपयोग आने वाले रेशमी धागे और अन्य सामग्री जुग्गी बस्तियों में रह रही गरीब महिलाओं को वितरित करते हैं, उनसे राखियां बनवाते है और उनको घर-घर तक पहुंचाते हैं।

दिल्ली प्रांत सेवा भारती ने भी निर्णय लिया है कि इस बार रक्षाबंधन पर्व पर चीन की बनी राखियों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। दिल्ली प्रान्त सेवाभारती ने अपने स्वयं सेवकों और आम लोगों से आह्वान किया है कि वे स्वदेश निर्मित एवं सेवा बस्ती में कार्य करने वाले अपने संगठन सेवाभारती की बहनों द्वारा बनाई गई राखियों का ही अपने परिवारों में उपयोग करें। सेवाभारती दिल्ली के सभी विभागों ने इस अवसर पर अपनी सेवा बस्ती की बहनों के द्वारा राखियां तैयार कराई हैं। इन राखियों को जिलों और मंडलों में वितरित किया जा रहा है। इनका शुल्क पांच राखियों के सेट का 40 रुपये एवं 100 राखियों के लिए 750 रुपये रखा गया है।

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इस स्वदेशी मुहिम को आगे बढ़ाने में लगी दिल्ली वार्ड नंबर 73 की भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा अध्यक्ष ऋचा गोबिल कहती हैं, "जब मुझे पता चला कि सेवा भारती सेवा बस्तियों की बहनों से राखियां बनवा रही है तो मैंने अपने वार्ड में राखियां बटवाने का निर्णय लिया। हमारे मंडल अध्यक्ष अनिल शर्मा ने भी इस काम में मेरा पूर्ण सहयोग किया।

हमने अपने पूरे वार्ड में राखियां वितरित करने लिये जगह-जगह स्टाल लगाए। अपने खंड कार्यकर्ता बहनों को भी इस काम में लगा दिया, जिससे यह मुहिम घर-घर आम लोगों तक पहुंचे और लोगों में स्वदेशी भावना प्रकट हो। लोग चीन में बनी राखियों का बहिष्कार करें। जो बंधु एवं बहने राखी अपने घरों में अपने मित्रों, परिचितों को देना चाहते हों उनके लिए मैंने अपना संपर्क सूत्र भी फेसबुक और व्हाट्सअप जैसे सोशल प्लेटफार्म पर दे दिया था। अब तक मैं अपने वार्ड में हजारों राखियां वितरित कर चुकी हूं।"

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(हिन्दुस्थान समाचार)

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