बाहुबली विधायक विजय मिश्रा को क्यों लग रहा है डर

बाहुबली विधायक विजय मिश्रा को क्यों लग रहा है डर
बाहुबली विधायक विजय मिश्रा को क्यों लग रहा है डर

  • ये भदोही जिले के ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्र के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा हैं.. 

एक ऐसे वक्त में जब यूपी में गैंगस्टर्स और बाहुबली नेताओं पर शिकंजा कसता जा रहा है... उसे देखते हुए ये भी चौकन्ने हो गए हैं...

हाल ही में इन्होंने एक वीडियो जारी करके आशंका जताई है कि पुलिस उनकी कभी भी हत्या कर सकती है. विजय मिश्रा ने इस वीडियो में आरोप लगाया है कि ब्राह्मण होने की वजह से उन्हें परेशान किया जा रहा है और उनकी हत्या की जा सकती है.

यह वीडियो सामने आने के बाद राजनीति फिर गरमा गई है और इनके प्रति लोगों का प्यार उमड़ पड़ा है.. अब क्यों प्यार उमड़ा है.. इसे समझने के लिए किसी राकेट साइंस की जरूरत नहीं है.. लेकिन इसे समझने के लिए आपको एक बार बैकग्राउंड में जाना पड़ेगा..

बात साल 2017 की है.. जब यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में मोदी लहर के बावजूद भदोही जिले की ज्ञानपुर सीट पर बाहुबली नेता विजय मिश्रा ने लगातार चौथी बार जीत हासिल की थी.

निषाद पार्टी से विजय मिश्रा ने बीजेपी के महेन्द्र कुमार बिंद 20 हजार वोटों से शिकस्त दी थी.  विजय मिश्रा का राजनीतिक करियर कांग्रेस से शुरू होकर समाजवादी पार्टी से बगावत के बाद निषाद पार्टी तक पहुंचा है.

कांग्रेस से 30 साल पहले भदोही में ब्लॉक प्रमुख बनने वाले विजय मिश्रा ने ज्ञानपुर सीट से 2002, 2007 और 2012 में विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट से जीता.

साल 2017 में अखिलेश यादव ने बाहुबलियों का टिकट काटने की पॉलिसी में विजय मिश्रा का भी टिकट काट दिया. हालांकि निषाद पार्टी से चुनाव लड़कर विजय मिश्रा विधानसभा पहुंच गए, जबकि उनकी पत्नी रामलली विधानपरिषद की सदस्य हैं.

ये तो रहा इनका राजनैतिक सफर.. अब बात करते हैं इनके आपराधिक बैकग्राउंड पर..

इस वक्त विजय मिश्रा पर हत्या, लूट, हत्या के प्रयास, छिनैती जैसे 63 मामले दर्ज हैं.. और बालू-गिट्टी, ठेका, सड़क निर्माण और पंचायती चुनाव तक इनका सिक्का बोलता है.. साथ ही कई विभागों में रजिस्ट्रेशन कराकर उनके नाम से ठेकेदारी भी हो रही है.

पैसे का लेन-देन अपने स्वयं के फर्मों के खाते में, अपनी पत्नी रामलली और अपने पुत्र विष्णु मिश्र के खाते में जमा की जाती है. सच कहें तो पूर्वांचल में इस धंधे में विजय मिश्र के इशारे के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता है..

थोड़ा और पीछे चलें तो वर्तमान में भाजपा के कैबिनेट मंत्री और साल 2007 में बसपा सरकार से कैबिनेट मंत्री रहे प्रयागराज के नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर 12 जुलाई 2010 को राजनैतिक अदावत के चलते रिमोट बम से हमला किया गया था. जिसमें इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार विजय प्रताप सिंह भी मारे गए थे..

यह हमला इन्हीं विजय मिश्रा के इशारे पर करवाया गया था और जिस वक्त ये हमला हुआ था, विजय समाजवादी पार्टी से विधायक थे.. बसपा सरकार ने इन पर धारा 14ए गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही की थी..  वे इस मामले में जेल में बंद थे.. इसके बावजूद भी विजय के कद का अंदाजा लगाइए कि वे साल 2012 में जेल से ही सपा से चुनाव जीत गए..

जैसे ही सपा की सरकार की बनी विजय मिश्रा जेल से बाहर आ गए और रसूख का फायदा उठाते हुए उनकी जिन जिन संपत्तियों को कोर्ट के आदेश पर सील करके कुर्क करने का आदेश दिया था.. उसका उल्लंघन करते हुए तोड़ दिया.. लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई.. क्योंकि तब वो खुद सरकार थे.. 

अब बस यूं समझ लीजिए कि आजकल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर इनके पिछले सारे कारनामों का हिसाब किताब हो रहा है.. और इसलिए इन्हें डर लग रहा है...

( दीपक पाण्डेय की फेसबुक वाल से )