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आइये जाने कैसे बने IAS अधिकारी

निर्माण आईएएस एकेडमी के डायरेक्टर कमल देव से एक खास मुलाकात हुई। जिसमें उन्होंने जिंदगी के अनुभव से शुरूआत कर कोचिंग इंस्टीट्यूट तक की बात की। हमारी खास बातचीत में उन्होंने अपनी जिंदगी के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पीसीएस में सेलेक्शन होने के बावजूद भी मन की सिर्फ एक चाह आईएएस बनने की थी।

शुरूआती दिनों में मन की ख्वाहिश व जुनून था कि आईएएस बनूं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मेरे साथ के 6 साथियों का सेलेक्शन हो चुका था। एक अकेला मैं ही था जिसका सेलेक्शन नहीं हुआ था। ये जीवन का सबसे बड़ा निराशा का दौर था। किन्तु शीघ्र ही निराशा से उबर कर आशा की किरण बनने की ओर मार्ग प्रशस्त हुआ।
पीसीएस में सेलेक्शन के कुछ वर्ष बाद मन में एक भावना जागृत हुई कि क्यों ना स्टूडेंट्स को सही मार्ग दिखाकर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी की जाए।

राष्ट्र निर्माण की बात से ही कोचिंग इंस्टीट्यूट से "निर्माण आइएएस" का नाम दिलो दिमाग में छा गया और निर्माण आईएएस अकेडमी की स्थापना कर गरीब विद्यार्थियों को उचित प्रबंधन व सहयोग के माध्यम से देश की सर्वोच्च सेवा में पहुंचाने के लिए भी प्रतिबद्ध हुआ।

आपका कहना था कि वास्तव में होनहार छात्रों के लिए गरीबी एक अभिशाप होती है। विपरीत परिस्थिति में तमाम छात्र मन से हारने लगते हैं। लेकिन मैं वा हमारी टीम जामवंत की तरह याद दिला देते हैं कि "होनहार वीरवान के होत चीकने पाद" अस्तु गरीबी को वरदान बनाकर विपरीत परिस्थितियों को चुनौती समझकर डटकर सामना करना सिखा देते हैं।

हम एक परिवार की तरह काम करते हैं। एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं। ऐसी कोई कमजोरी नहीं जिसका खात्मा करके ताकतवर न बना जा सके और बनाया जा सके। यही हमारा फार्मूला है। इसी का परिणाम रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में सरोज कुमार नाम के छात्र ने आईएएस क्वालिफाई किया। जो कि हाल ही में बुंदेलखण्ड के बांदा मे रहे हैं। हरीश प्रतिकूल आर्थिक परिस्थिति से थे लेकिन आज वो एसपी हैं।

अमीर व उच्चस्तरीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले छात्र आते हैं। अच्छी बात है कि उनके सामने आर्थिक परेशानी नहीं होती है किन्तु छात्र जिस उम्र में होते हैं। उसमें अनेक ऐसी समस्यायें आ जातीं हैं। जहाँ उन्हें जिंदगी व कैरियर की इस जंग में एक अच्छे साथी व मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है। उस वक्त भी हमारी मनोवैज्ञानिक टीम मानसिक स्तर पर अच्छा सहयोग करती है।

सेमिनार आदि कार्यक्रम के माध्यम से भी स्टूडेंट्स के पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर अत्यधिक फोकस किया जाता है। बल्कि देश की सर्वोच्च सेवा में जाने के लिए पर्सनैलिटी डेवलपमेंट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। व्यक्ति के उठने बैठने बोलने का तरीका भी अत्यधिक प्रभावित करता है। जो आईएएस व पीसीएस क्वालीफाई करने हेतु सबसे बड़ी आवश्यकता है। किसी भी स्टूडेंट के व्यक्तित्व में इस तरह से निखार लाया जाता है कि एग्जाम क्वालीफाई करने से पहले ही वो प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी हो जाए।
स्वयं में एक परीक्षा पास कर स्टूडेंट में आत्मविश्वास आ जाता है। फुल कान्फिडेंस ही सक्सेस की First key (प्रथम कुञ्जी) है।

इस बीच ही शहर और गांव के स्टूडेंट्स के सम्बन्ध में जब चर्चा की गई, तो एक सबसे बड़ी बात निकलकर सामने आई कि गांव के छात्रों में अत्यधिक जुनून पाया जाता है। किन्तु वह एक खास मानसिक दबाव में होते हैं। गांव से शहर की ओर रूख करते हुए भी उनके अंदर एक खास मानसिक दबाव घर कर लेता है। तमाम गांव के लड़के जिद लेकर भी आते हैं कि उन्हें लक्ष्य प्राप्त करना है। अर्जुन की भांति चिड़िया की आंख का निशाना साधकर जो छात्र आया वो गांव का हो या शहर का हो अन्य के मुकाबले कठिन परिश्रम व एक लक्ष्य से सफलता शीघ्र अर्जित की है।हालांकि गांव के लड़कों के अंदर की क्षमताओं को अत्यधिक निखारना होता है। तब हमें याद आता है कि "रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान"।

वो एक मंदबुद्धि बालक की कहानी याद आ जाती है कि स्कूल से निकाल दिया जाता है। जब वो कुएं के पास पहुंचता है, तो कुएं के अंदुरूनी हिस्से पर रस्सी के निशान देखकर हैरान रह जाता है। उसे अथक परिश्रम पर विश्वास हो जाता है कि जब एक रस्सी पत्थर पर अपना निशान छोड़ सकती है। उसके दिमाग में भी अथक परिश्रम से निखार आ सकता है। अंततः वह छात्र ही गणित का सबसे बड़ा विद्वान बना था।

इसलिये हमनें निर्माण नाम चुना था। क्योंकि नेशन बिल्ड करने हेतु हमें भी स्टूडेंट्स का बिल्डर बनना पड़ता है। मोटिवेशनल स्पीकर के द्वारा छात्रों को जागरूक करना, समय समय पर प्रेरणा देने का व्यहारिक काम सहजता सरलता से चलता रहता है।

इस कारण से ही निर्माण एकेडमी के बीतते 10 वर्ष में लगभग 700 छात्र विभिन्न कम्पटीशन पास करके देश की सर्वोच्च सेवा में सर्वोत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। क्यों निर्माण आईएएस एकेडमी चरित्र निर्माण भी करती है। हमारा विश्वास है कि हमारा स्टूडेंट कर्तव्य पूर्ण ईमानदारी से निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में भागीदार बन रहे हैं। इसलिये यहाँ से पास आऊट टाॅपर स्टूडेंट्स प्रत्येक वर्ष स्टूडेंट्स से अपना अनुभव साझा करने अवश्य आते हैं। जिससे तमाम कमापटीशनर को मार्गदर्शन व प्रेरणा प्राप्त होती है। जब वो अमीरी गरीबी से निकलकर हर परिस्थिति को पार करने वाली सफलता की सच्ची कहानी सुनते हैं, तब जाकर उनके अंदर की निर्माण प्रक्रिया अपना मूर्तरूप धारण करती है। इसलिये हम देश और समाज को एक नौकर नहीं देते, अफसरशाह नहीं देते बल्कि एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व प्रदान करते हैं, जो सेवा के क्षेत्र में सेवा भाव से रहता है।

इसलिये मेरा मानना है कि बेशक मैं आईएएस बनना चाहता था। किन्तु ईश्वरीय सत्ता को यह मंजूर था कि मैं आईएएस बनाऊं। कहते हैं ना जीवन में कुछ लोग किंग मेकर होते हैं। वैसे ही ईश्वर ने मुझे आईएएस मेकर बनाकर भेजा था। जो मुझे देर से पता लगा लेकिन वक्त रहते जीवन उद्देश्य महसूस हुआ और आज देश व समाज को सर्वोच्च सेवा में जाने वाले युवा, युवतियां दे पा रहा हूं। बेशक लड़कियां बेहद ईमानदारी से मेहनत करना जानती हैं। लड़कों की अपेक्षा एकाग्रता अधिक पाई जाती है। वैसे भी ईश्वर ने लड़कियों को बुद्धि के सम्बन्ध में लड़कों से अधिक प्रतिशत प्रदान किया है। इसलिये मैं समाज से कहना चाहता हूं कि बेटी पढाओ और इसलिए ही पीएम मोदी का विजन दिलो दिमाग में आ गया कि "बेटी बचाओ बेटी पढाओ"। सच है कि बेटियां सफलता प्राप्त करने में सक्षम हैं। एक सफल बेटी ही माता-पिता का गौरव होती है।

जब हम बुंदेलखण्ड के बारे में चर्चा करते हैं तो मि. कमलदेव अत्यधिक गंभीरता से कहने लगते हैं कि वास्तव में सबसे अधिक कहीं काम करने की जरूरत है तो वह बुंदेलखण्ड ही है। आपने कहा कि बुंदेलखण्ड से आने वाले स्टूडेंट्स को विशेष रियायत दी जायेगी। निर्माण एकेडमी का सपना बुंदेलखण्ड निर्माण का भी है। हमारा ग्वालियर में निर्माण आईएएस का केन्द्र इस कार्य को करने के उद्देश्य से ही शुरू किया गया है। साथ ही इलाहाबाद भी बेहद समीप है जहाँ निर्माण आईएएस का एक केन्द्र स्थापित है।

बुंदेलखण्ड के अब तक जितने भी स्टूडेंट्स आए हैं। सब खासे दबाव में महसूस हुए थे। यकीनन माहौल का फर्क पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र तथा शहरी क्षेत्र के स्टूडेंट्स में यही एक महीन सा अंतर है, जो बहुत बड़ा फर्क भी महसूस कराता है। तब भी हम ग्रामीण इलाके के स्टूडेंट्स को शहरी क्षेत्र के स्टूडेंट्स के मुकाबले लाकर खड़ा कर देते हैं। यही अद्भुत क्षमता है हमारी टीम की।

इसलिये आज निर्माण आईएएस एकेडमी ही स्टूडेंट्स की फर्स्ट च्वाइस बनती जा रही है। हम गरीब तबके के स्टूडेंट्स को विशेष छूट प्रदान कर उत्तम अवसर प्रदान करते हैं। हम व्यलसायिकता से दूर हटकर व्यवहारिकता की आधारशिला से राष्ट्र निर्माण करते हैं।

मुझे आप से बात करके बहुत खुशी हुई। साथ ही अंत में आजादी के दिन की समीपता की सुगंध महसूस करते हुए देश भर के स्टूडेंट्स को संदेश देना चाहता हूं कि राष्ट्र की एकता अखंडता तथा आजादी को अक्षुण्ड रखने हेतु शिक्षा व सेवा के मार्ग से ही कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।

 



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