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झाँसी एडीएम का स्टेनो पिछले 8 सालों से पाकिस्तान को भेज रहा था खुफिया जानकारी

उत्तर प्रदेश एटीएस ने एक बड़ी कार्यवाही के दौरान खुलासा किया कि झाँसी एडीएम कार्यालय में तैनात स्टेनो राघवेन्द्र 2009 से लगातार फोन पर सेना से सम्बन्धित जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था।

उत्तर प्रदेश एटीएस के मुताबिक राघवेन्द्र इस मामले में संदिग्ध है, जिसे हिरासत में लेकर करीब 13 घण्टों तक पूछताछ की गई। साथ ही एटीएस टीम द्वारा राघवेन्द्र का मोबाइल फोन, उसकी पत्नी का मोबाइल, बैंक से जुडे़ दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज एटीएस ने अपने कब्जे में ले लिए है। जांच के दौरान राघवेन्द्र के मोबाइल में एक 9 अंक का मोबाइल नं. पाया गया। पूंछतांछ में उसने बताया कि इसी नंबर पर जारी जानकारी दी जाती थी। जानकारी लेने वाला अपने आप को मेजर यादव बताता था।
उ.प्र. एटीएस को जानकारी मिली थी कि झाँसी में भारतीय सेना से सम्बन्धित जानकारी पाकिस्तान को दी जा रही है। जब एटीएस ने झाँसी में एडीएम कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों से पूंछतांछ शुरू की गयी तो पता चला कि एडीएम कार्यालय में नियुक्त स्टेनो राघवेन्द्र अहिरवार जुलाई 2009 से जुलाई 2017 तक कार्यालय में तैनात रहे। वर्तमान में वह झाँसी एसडीएम सदर कार्यालय में तैनात हैं। वह लगातार 2009 से सेना से सम्बन्धित जानकारी पाकिस्तान भेज रहे थे।

जब एटीएस के डीएसपी मनीष सोनकर ने राघवेन्द्र से पूंछतांछ की तो उसने स्वीकार किया कि उसके द्वारा समय-समय पर जानकारी एक फर्जी मेजर को दी गयी। साथ ही उसने ये भी स्वीकार किया कि उसके द्वारा भारतीय सेना से प्राप्त पत्राचारों और अभिलेखों का रख-रखाव किया जाता था। जानकारी इसी से सम्बन्धित होती थी। साथ ही उसने बताया कि उसने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की कि एक मेजर रैंक का अधिकारी उससे सीधी बात करके जानकारी क्यूं लेता हैं और वह व्यक्ति 2009 से एक ही रैंक पर क्यों है।

इस सारे मामले के तहत एसडीएम भी जांच के दायरे में आ गये हैं। एटीएस का कहना है कि वो इस बात की जांच कर रही है कि इस अवधि में नियुक्त एडीएम की क्या भूमिका रही है। साथ ही इसकी भी जांच  की जायेगी कि इस कार्य में और कौन-कौन शामिल है। साथ ही तकनीकी जांच भी की जा रही है जिससे यह पता चल सके कि काॅल कहां से आती थी।



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