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युगल लोकगीतों की धूम पर पूरी रात नाचते रहे दर्शक

ऐतिहासिक कीरत सागर पर चल रहे कजली महोत्सव में शुक्रवार की रात आल्हा मंच पर नृत्य व लोक गीतो की धूम रही। आधा दर्जन से अधिक दूर दराज से आई पार्टियों के कलाकारों ने लोक गीत, लोक नृत्य व फिल्मी गीतों पर शानदार नृत्य की प्रस्तुतियां दी। जिसे देखने के लिये देर रात्रि तक हजारों की संख्या में दर्शकों की भीड जुटी रही। प्रत्येक गीत पर दर्शकों ने नगद धनराशि देकर कलाकारों का उत्साह वर्धन किया। सुरक्षा की दृष्टि से कार्यक्रम स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने लाखों की भीड को बडी ही सूझबूझ के साथ सम्भाले रखा।

आल्हा मंच में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की चैथी शाम युगल लोक गीतों के नाम रही। शुभारम्भ के साथ मऊरानीपुर, ललितपुर, छतरपुर, पनवाडी, झांसी, सूपा के पार्टी के कलाकारों ने लोक गीतों की प्रस्तुतियां दी। रवि तूफानी के हास्यप्रद डांस को दर्शकों ने दिल से सराहा तथा बार बार इनके नृत्य पेश करने की मांग की। सूपा से आये कलाकार अशोक कुमार मिश्रा व सीमा कुशवाहा ने सैयां मेला तो महोबा को दिखाउने तथा रजनी और शिवकुमार पंकज ने अगर हमसे सला लो, अपनो मेल मिला चूंको न रजनी झीका बारे खो पटा लो। पं0 ललता प्रसाद तिवारी तथा सीमा द्वारा प्रस्तुत लोक गीत आज चोंख के रहने, करियों न बहाने को दर्शकों ने बहुत सराहा तथा इस लोक गीत पर इनामों की झडी लगा दी। अशोक मिश्रा तथा सीमा कुशवाहा ने बोल कागा बोल मेरे राम कब आयेंगे लोक गीत सुनाया।

भागीरथ भास्कर टीवी रेडियो सिंगर पनवाडी तथा संगीता सिंह झांसी ने धनिया की चुनरिया रंगाऊने, घोरो रे कटोरा रंग केशर के लोकगीत को भी दर्शकों की वाहवाही मिली। तो वही रघुवीर सिंह यादव झांसी तथा मघु अग्रवाल झांसी ने राई गीत प्रस्तुत किया। जिस पर क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा जबरदस्त नृत्य प्रस्तुत किया।  इसके बाद भजन भज लो सीताराम, भज लो सीमाराम तुलसी की माला ले लो हाथ में सुनाया।
हेमन्त तूफानी के नृत्य के साथ साथ मजीरा वादक गनेश व हेमन्त के हास्य नृत्य को जमकर सराहा गया तथा दर्शकों ने इन दोनों मजीरा वादकों की दिल से प्रशंसा की। रामकुमार द्विवेदी ललितपुर एवं सीमा कुशवाहा के लोकगीत तनक चुखा दईयो टोन दो पईसा में पर दर्शकों ने जमकर नृत्य किया तथा लोकगीत की जमकर सराहना की। वही प्रेमचन्द्र अनुरागी पनवाडी जीजा साली के चुंमन में घायल हो गये रे लांगुरिया।

अशोक मिश्रा एण्ड पार्टी सूपा के कलाकारों अशोक व कमलेश कुशवाहा ने अपने सुरीले युगल लोकगीतों पिया मिट न जावे तुम्हारो ठिया, अबकी बिन्नू ठाडो हो गये, सरका लोय खटिया बालमा मुढे रात को नींद न आई तथा उठत भोर से तुम्हें कडा दें, जैसई कडे उरईयां, मोरो रात भर को काम चला दो घरवारी है नईयां आदि ने दर्शकों को बांधकर रखा। जिसमें कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीत लिया।

लालता प्राद तिवारी व साथी सीमा कुशवाहा ने जीजा के ऊपर सारी चढी, घरवारी देखे खडी खडी को सुनकर माहौल तालियों से गूंज उठा। कुंवारे लडको के लिये कहा कोऊ माने या न माने ये लरका फिरत व्याह के लाने व शादी शुदा के लिये मेरी भांवरे उकेर डारो पंडित तजी फिर से करवा दो क्वारों लालता का दोहा सुन दर्शक रोमांचित हो गये। देर रात्रि तक लोक गीत सुनने के लिये दर्शक अपनी जगह पर डटे रहे। कार्यक्रम का संचालन पं0 लालता प्रसाद पनवाडी ने किया। इस मौके पर आल्हा मंच के अध्यक्ष शरद तिवारी दाऊ ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह व शील्ड देकर पुरुस्कृत किया।



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