अंधेर गर्दी: इलाज शुरू करने से पहले पकड़ा दी दवा की पर्ची, सीएमएस ने दिए जांच के आदेश

सरकार एक तरफ दावा करती है कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद...

अंधेर गर्दी: इलाज शुरू करने से पहले पकड़ा दी दवा की पर्ची, सीएमएस ने दिए जांच के आदेश

 सरकार एक तरफ दावा करती है कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद है दवाएं भी उपलब्ध हैं। वही सरकार के इन दावों पर स्वास्थ्य कर्मी पलीता लगा रहे हैं। खासकर डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखकर अपनी जेब भर रहे हैं। ताजा मामला जिला अस्पताल बांदा का है। जहां जहरीला पदार्थ खाने पर एक युवक को इलाज के लिए लाया गया था। डॉक्टर ने मरीज को देखने से पहले ही दवा की पर्चियां लिखकर तीमारदारों को थमा दिया। इस मामले में सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं।

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बांदा शहर के तुलसी नगर निवासी शिवम पांडे ने मंगलवार की रात जहरीला पदार्थ खा लिया था। जिससे परिवार के लोग उसे इलाज के लिए उसे जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर ले गए। मरीज के भाई ऋषभ सिंह ने डॉक्टर को अपने भाई के बारे में जानकारी दी गई। डॉक्टर ने मरीज को देखे बिना यहां तक की मरीज को भर्ती भी नहीं किया गया और दवा की पर्ची थमा दी गई। जिससे तीमारदारों को बाहर से 500 रुपए की दवा खरीदकर लानी पड़ी।

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इसी तरह मरीज शिवम पांडे ने बताया कि मेरे पेट में दर्द था। परिवार के लोग मुझे अस्पताल लेकर आये थे। डॉक्टर ने मुझे देखने से पहले ही बाहर लेटने को कहा। तब तक मैं अस्पताल की बेंच पर पड़ा रहा। इस बीच डॉक्टर द्वारा दवा लिखकर दे दी गई। जिससे परिवार के लोग बाहर से दवा खरीद कर लाए थे। कुछ देर बाद मुझे भर्ती कर लिया गया लेकिन तब भी बेड नहीं मिला। एक स्ट्रेचर पर ही मुझे लेटने को कहा गया था।

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वहीं बाहर की दवा लिखने के मामले की जानकारी मिलने पर सीएमएस ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शासन के सख्त निर्देश के बाद भी कुछ नए डॉक्टर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। कई बार लिखित चेतावनी भी दी गई है। इसके बाद भी उनमें सुधार नहीं आ रहा है। जिस डॉक्टर द्वारा यह कृत्य किया गया है उसका नाम डॉक्टर आकाश सिंह है जो संविदा पर है। इसकी शिकायत जिला अधिकारी से भी की जाएगी और विभाग की तरफ से चेतावनी भी दी जाएगी। मामले की जांच के बाद जरूरत पड़ने पर उनकी सेवा भी समाप्त की जा सकती है।

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