बेहतर आवभगत के सहारे अलग बुन्देलखण्ड राज्य व रोजगार पर आशामय बुंदेले

शुक्रवार को 19 नवम्बर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को बुन्देलखण्ड की जनता बड़ी आशा एवं उम्मीद की नजर से देख..

बेहतर आवभगत के सहारे अलग बुन्देलखण्ड राज्य व रोजगार पर आशामय बुंदेले
बुन्देलखण्ड राज्य (Bundelkhand state)

शुक्रवार को 19 नवम्बर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को बुन्देलखण्ड की जनता बड़ी आशा एवं उम्मीद की नजर से देख रहा है। जिसमें बुन्देलखण्ड वासियों को काफ़ी लंबे समय से चले आ रहे शिक्षा ,स्वास्थ्य ,रोज़गार एवं बुन्देलखण्ड अलग राज्य बनाओ अभियान के अन्तर्गत नई घोषणा की उम्मीद है । पिछले एक हफ्ते से हलचल मय बुन्देलखण्ड अपने स्वागत स्वभाव के फलस्वरूप उम्मीदों का दामन फैलाये बैठा है। अब आगे ये देखना जरूरी है कि प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री एवं अन्य प्रमुख माननीयों के बुन्देलखण्ड दौरों से विकास का ऊंट किस ओर करवट लेता है ।

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प्रधानमंत्री के द्वारा उत्तरप्रदेश चुनावी अभियान की प्रतीकात्मक शुरुआत  के लिये बुन्देलखण्ड के दो प्रमुख मंडल बाँदा चित्रकूट मंडल के अंतर्गत महोबा और झाँसी मंडल में झाँसी हो रही है। जिसके अन्तर्गत लगभग 32 अरब की लागत से तैयार परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाना तय है, काफी लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे चित्रकूट एवं झाँसी मण्डल में सिंचाई एवं जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं के लोकार्पण के माध्यम से जनता के बीच एक सकारात्मक सन्देश देने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें सरकार की महत्त्वपूर्ण अर्जुन बाँध परियोजना जो कि 2655.35 करोड़ रुपये की लागत से कई बाँधो को आपस मे जोड़ कर शुरू की गई है।

जिसमें महोबा, हमीरपुर , बाँदा के 168 गाँवो के किसानों को लाभान्वित कर बेहतर सिंचाई एवं पेयजलापूर्ति देने का प्रयास किया जा रहा है , इसके अलावा 54.28 करोड़ की लागत से रतौली बाँध परियोजना, 512.74 की लागत से ललितपुर जिले की भवानी बाँध परियोजना, 18.24 की लागत से मझगवां हमीरपुर एवं चिल्ली स्प्रिंकलर सिंचाई योजना का लोकार्पण प्रस्तावित है इन योजनाओं के  माध्यम से सरकारी मशीनरी एवं राजनीतिकारों के द्वारा जन वाहवाही लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाना चाहते हैं।

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जिससे सरकारी विभाग एवं जननेताओं का राजनैतिक भविष्य सफल एवं सुखमय हो सके जबकि क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही माँगो पर अब भी जगह जगह जनाक्रोश जनप्रतिनिधियों से बना हुआ है जिसमें जैतपुर, पनवाड़ी ग्राम पंचायत को विगत डेढ़ दशक नगर पंचायत को दर्जा देने की माँग प्रमुख है,जिसमें आवादी के लिहाज से ये ग्राम पंचायतें मंडल की सबसे बड़ी पंचायत है।

बुन्देलखण्ड राज्य (Bundelkhand state)

एवं जनसंख्या के मानक, स्कूल , महाविद्यालय , मंडी समिति,ब्लाक एवं अन्य निर्धारित मानक नगर पंचायत के अनुरूप है,जिस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा दर्जनों बार शासन को प्रस्ताव भेजा गया,गजट नोटिफिकेशन व आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद भी जैतपुर, पनवाड़ी को नगर पंचायत बनाने हेतु अंतिम मुहर नहीं लगी सकी। जिसके लिए यहां की जनता स्थानीय विधायक को जिम्मेदार मानते हुए असंतुष्ट हैं।

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विभिन्न सरकारों के अन्य जनप्रतिनिधियों  एवं बर्तमान जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता द्वारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्यसचिव को सम्बोधित पत्र समय समय पर दिये गए लेकिन अभी तक कोई सुनावई क्रियात्मक अमल में नहीं लायी गयी जो कि असंतोष को विषय है। इसी के तरह बुन्देलखण्ड अलग राज्य बनाओ अभियान, महोबा मेडिकल कालेज, रामनगर अर्धनिर्मित बालिका विद्यालय, महिला महाविद्यालय व रोज़गार से सम्बंधित योजनाएं भी जनता की नजर में सैकड़ों बार माँग के बाबजूद लंबित है, यहाँ के क्षेत्रों से आज भी हजारों की तादात में मजदूर रोजगार की तलाश में महानगरों का ही रुख करते हैं 

यह उदासीनता आगामी सरकार के सत्त्ता पर काबिज़ होने की राह  में घातक साबित हो सकते है ये वही सरकार है जिसको बुन्देलखण्ड की जनता ने 2017 के विधानसभा चुनाव में अपने अपार जनसमर्थन के परिपेक्ष्य में सभी 19 सीटों पर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज़ किया गया था। जिससे सरकार उनपर ध्यान दे लेकिन जनता को निराशा ही हाँथ लगी यदि अभी भी समय रहते सरकारों के द्वारा जनता की बुनियादी माँगो पर विचार नहीं किया गया तो एक बड़ा तबका चुनावी मौसम में असंतोष की राह जा सकता है ।

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