मतों की गिरावट से बुंदेलखंड में प्रत्याशियों की सांसें अटकी

इस बार बुंदेलखंड की चारों सीट पर उम्मीद से कम मतदान हुआ है.....

मतों की गिरावट से बुंदेलखंड में प्रत्याशियों की सांसें अटकी

  • कम अंतर से हार जीत का अनुमान

बांदा,

बुंदेलखंड में पिछले 10 वर्षों से चारों सीटों पर काबिज भारतीय जनता पार्टी इस बार हैट्रिक लगाने को चुनाव मैदान में उतरी थी। साथ ही पार्टी को अपना किला बचाने की भी चुनौती थी। इसीलिए प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और दो मुख्यमंत्री इतने ही डिप्टी सीएम ने चुनाव प्रचार के माध्यम से मतदाताओं को अपने पाले में लाने की भरपूर कोशिश की। इसके बाद भी मतदाताओं का उत्साह ठंडा रहा। कम मतदान होने से सभी प्रत्याशियों की सांस थम सी गई हैं। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं इस बार पांसा पलट न जाए।

इस बार बुंदेलखंड की चारों सीट पर उम्मीद से कम मतदान हुआ है। अलग- अलग इलाके में कहीं सुबह से ही लाइन लगे रहने और कहीं सन्नाटा होने से उम्मीदवारों की सांसें अटकी है। ऐसे में हार-जीत का आंकड़ा बेहद कम होने के साथ ही सियासी समीकरण बदलने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि भाजपा कांग्रेस सपा और बहुजन समाज पार्टी के नेता अपनी- अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। किसी को राम मंदिर के भरोसे चुनावी बैतरणी पार होने की उम्मीद है। किसी को बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर संसद भवन पहुंचने की आस है और किसी को अपने कैडर मतदाताओं पर भरोसा है।


लेकिन जिस तरह से मतदाताओं का उत्साह पिछले चुनाव की तुलना में कम रहा है। उससे सभी दलों की चिंता बढ़ गई है। अगर हम झांसी लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां पिछली बार 67.68 फीसदी मदतान हुआ था, जिसमें भाजपा को 58.61 और सपा-बसपा और कांग्रेस को मिलाकर 38.36 फीसदी वोट मिला था। इस बार यह आंकड़ा 63.70 फीसदी पर ही अटक गया है। हालांकि पिछले बार भाजपा प्रत्याशी ने यहां गठबंधन प्रत्याशी को करीब 2 लाख मतों के अंतर से हराया था। इसके बाद भी भाजपा की धुकधुकी बढ़ी है ।

बांदा में 2019 में 60.81 फीसदी मतदान हुआ, जिसमें भाजपा 46 फीसदी और सपा-बसपा और कांग्रेस को 41.32 फीसदी वोट मिला था। इस बार 59.64 फीसदी मतदान हुआ है। खास बात यह है कि बांदा में मुस्लिम बहुल इलाके के बूथ पर सुबह से ही भीड़ देखी गई, लेकिन ब्राह्मण बहुल इलाके में उत्साह की कमी रही। मतदान के बाद नरैनी विधानसभा क्षेत्र में बसपा और भाजपा में कांटे की लड़ाई दिखाई दी। बांदा में भाजपा और सपा में लड़ाई नजर आई तो वही बबेरू में सपा सब भारी रही है। वही चित्रकूट के दोनों विधानसभा में बसपा सपा और भाजपा के बीच त्रिकोणात्मक मुकाबला रहा। जिससे इस सीट पर भी कम अंतर से हार जीत का अनुमान लगाया जा रहा है।


हमीरपुर में पिछली बार 62.32 फीसदी की अपेक्षा इस बार 60.56 फीसदी मतदान हुआ है। यहां राठ में 63.05 फीसदी और महोबा में 60.08 फीसदी मतदान हुआ है। 
दोनों ही क्षेत्र में लोध मतदाता निर्णायक हैं। यहां भी भाजपा ने गठबंधन प्रत्याशी को 2019 में बड़े अंतर से हराया था। लेकिन इस बार परिस्थितियों बदली है। जिस तरह से लोध मतदाता सपा के पक्ष में नजर आया, इसके कारण इस सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जालौन में 58.49 की अपेक्षा इस बार 56.15 फीसदी मतदान हुआ है। माधौगढ़ विधानसभामें सिर्फ 52.80 फीसदी मतदान हुआ है। यह क्षत्रिय बहुल इलाका है। इस सीट पर भाजपा को जीत का अनुमान है। लेकिन पार्टी के नेताओं को मतों की गिरावट चिंता का सवब बनी हुई है।

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