क्या आप जानते हैं, मुलायम के विरोध करने पर शाहू जी महाराज नगर का नाम बदलकर चित्रकूट करना पड़ा था ?

भाजपा बसपा गठबंधन के दौरान मुख्यमंत्री मायावती ने चित्रकूट का नाम बदलकर शाहू जी महाराज कर दिया था। चित्रकूट का नाम...

क्या आप जानते हैं, मुलायम के विरोध करने पर शाहू जी महाराज नगर का नाम बदलकर चित्रकूट करना पड़ा था ?

भाजपा बसपा गठबंधन के दौरान मुख्यमंत्री मायावती ने चित्रकूट का नाम बदलकर शाहू जी महाराज कर दिया था। चित्रकूट का नाम बदलने का मुलायम सिंह यादव ने विरोध किया था। उनके निर्देश पर जिला समाजवादी पार्टी ने चित्रकूट में साढ़े तीन माह तक क्रमिक अनशन किया था। बाद में भाजपा के कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने। इस दौरान रक्षा मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने चित्रकूट में बड़ी जनसभा करके सरकार बनने पर शाहूजी महाराज नगर का नाम बदल कर चित्रकूट करने का ऐलान किया था। लेकिन इसके मुख्यमंत्री बनते ही कल्याण सिंह ने शाहू जी महाराज नगर का नाम बदलकर पुनः चित्रकूट कर दिया था।

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यह मामला 1997 का है। उस समय बसपा सुप्रीमो मायावती और बीजेपी के बीच गठबंधन की सरकार बनी थी। 6-6 माह मुख्यमंत्री बनने की शर्त थी। पहले चरण में मुख्यमंत्री बनी मायावती ने बांदा जनपद को दो हिस्सों में बांट कर कर्वी चित्रकूट का नाम बदलकर 6 मई 1997 को शाहू जी महाराज नगर करके नए जिले का सृजन किया था। जिसमें करबी तथा मऊ तहसीलें शामिल की गई थी।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की तपोभूमि धर्म नगरी चित्रकूट का नाम शाहूजी महाराज किए जाने से साधु संत भड़क उठे थे। आक्रोशित साधु-संतों ने शाहू जी महाराज का नाम बदलकर पुनः चित्रकूट न करने पर आत्मदाह करने की धमकी दी थी। इतना ही नहीं बांदा चित्रकूट  संसदीय क्षेत्र भाजपा के सांसद रहे प्रकाश नारायण त्रिपाठी ने भी साधु संतों का समर्थन करते हुए आत्मदाह करने का ऐलान कर दिया था।

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इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी नाम बदलने का विरोध शुरू कर दिया। तत्कालीन रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने नाम बदलने का विरोध करते हुए पार्टी की जिला इकाई को आंदोलन करने की हरी झंडी दी। उस समय समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष रहे इम्तियाज खान ने आंदोलन की बागडोर संभाली। उन्होंने चित्रकूट पहुंच कर साधु संतों से मुलाकात की और कहां आपको आत्मदाह करने की जरूरत नहीं है। इस लड़ाई को समाजवादी पार्टी लड़ेगी।

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इस बारे में पूर्व समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष इम्तियाज खान बताते हैं कि साधु-संतों से मिलने के बाद भाजपा सांसद प्रकाश नारायण त्रिपाठी से भी मुलाकात हुई थी। उन्होंने भी इस आंदोलन में अपना समर्थन व्यक्त किया था। इसके बाद पार्टी ने चित्रकूट में ही धरना प्रदर्शन शुरू किया जो धीरे-धीरे क्रमिक अनशन में बदल गया। यह आंदोलन करीब साढ़े तीन माह तक चलता रहा। इस दौरान रक्षा मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव लगातार अब अपडेट लेते रहे और आंदोलन के लिए हौसला बढ़ाते रहे। बाद में उन्होंने मुझे दिल्ली के एक कार्यक्रम में बुलाया और आंदोलन को खत्म करने की सलाह दी। साथ यह भी कहा कि इसके लिए मैं स्वयं चित्रकूट आकर जनसभा करूंगा।

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उन्होंने वादा निभाते हुए 13 अक्टूबर 1997 को चित्रकूट स्थित एक इंटर कॉलेज के मैदान में रैली को संबोधित किया। इस रैली का नाम चित्रकूट नाम बचाओ रैली रखा गया था। इस रैली के माध्यम से मुलायम सिंह यादव ने जनसभा में कहा था कि प्रदेश में बसपा और भाजपा की मिली जुली सरकार है। दोनों की मिलीभगत से धार्मिक और  पौराणिक महत्व के चित्रकूट का नाम बदलकर शाहू जी महाराज किया गया है। इससे साधु संतों की भावनाएं आहत हुई हैं। सपा की सरकार आएगी तो सबसे पहले चित्रकूट का गौरव वापस करते हुए शाहू जी महाराज नाम बदलकर चित्रकूट कर दिया जाएगा।

बताते चलें कि इस बीच बसपा और भाजपा गठबंधन के समझौते के तहत कल्याण सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और उन्होंने सपा के विरोध को देखते हुए 4 सितंबर 1998 को शाहू जी महाराज का नाम बदलकर चित्रकूट कर दिया था।

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