ला - नीना तूफान से दिसम्बर में अबकी बार होगी अच्छी बारिश : मौसम वैज्ञानिक

समुद्र में कुछ इस प्रकार की मौसमी गतिविधियां बनने की संभावना है, जिससे ला—नीना तूफान उभरन सकता है। ऐसी परिस्थियों में अबकी बार मानसून..

ला - नीना तूफान से दिसम्बर में अबकी बार होगी अच्छी बारिश : मौसम वैज्ञानिक
बारिश

कानपुर,

  • मानसून के बाकी बचे दो महीनों में होगी सामान्य बारिश

समुद्र में कुछ इस प्रकार की मौसमी गतिविधियां बनने की संभावना है, जिससे ला—नीना तूफान उभरन सकता है। ऐसी परिस्थियों में अबकी बार मानसून की विदाई के बाद भी अक्टूबर से दिसम्बर तक अच्छी बारिश हो सकती है। हालांकि वर्तमान में मानसून के जो माह बचे हैं उनमें सामान्य बारिश होगी।

यह भी पढ़ें - उत्तर प्रदेश में तेज बारिश के बने आसार, 37 जिलों को किया गया अलर्ट

चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. एसएन सुनील पाण्डेय ने मंगलवार को बताया कि दुनियाभर के मौसमी मॉडल्स के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला-नीना तूफान उभरने की अच्छी परिस्थितयां बनने की संभावना है।

बारिश

पैसिफिक ओशन के क्लाइमेट पैटर्न एल-नीनो व ला-नीना इस समय न्यूट्रल फेज में हैं और मानसून खत्म होने तक यही स्थिति बनी रहेगी। इन दोनों क्लाइमेट पैटर्न से दुनियाभर का मौसम प्रभावित होता है। न्यूट्रल फेज में पैसेफिक ओशन के ऊपर से हवाएं पूर्व से पश्चिम की तरफ बहती हैं, जिससे पश्चिमी पैसेफिक की तरफ गर्म उमस वाली हवा और गर्म सतही पानी आता है। इससे सेंट्रल पैसिफिक ओशन ठंडा रहता है।

यह भी पढ़ें -  यूपी : जमकर बरस रहे बादल, आसमान में छाये बादलों से अभी और होने के आसार

  • जुलाई में कम हुई बारिश

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि मानसून मॉडल ने अगस्त में 94% से 104% बारिश के संकेत दिए हैं। वहीं अगस्त-सितंबर को मिलाकर 100% बारिश की संभावना है। अगस्त के दौरान सामान्य रूप से 258.1 मिमी और अगस्त-सितंबर मिलाकर 428.3 मिमी सामान्य बारिश होती है।

बारिश

जून-जुलाई के दौरान एक फीसदी कम बारिश हुई है। जून में सामान्य रूप से 166.9 मिमी बारिश होनी चाहिए लेकिन 182.9 मिमी बारिश हुई। हालांकि जुलाई में सामान्य (285.3 मिमी) से सात फीसदी कम (266 मिमी) बारिश हुई।

यह भी पढ़ें - भारी बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त, दर्जनों मकान गिरे, घरों में घुसा पानी

  • औसत बारिश का लंबे समय तक होना अच्छी बात

बताया कि मानसून में अच्छी बारिश होने के साथ ही देश में अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है। मानसून का सीधा असर फसलों और पैदावार पर पड़ता है। खेती के लिहाज से औसत बारिश का लंबे समय तक होना अच्छी बात है।

बारिश

अगस्त व सितंबर की औसत बारिश से फसलों की अच्छी उपज होगी। भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यहां मानसून के साथ ही खरीफ की फसलों की बुवाई भी शुरू हो जाती है जो पूरी तरह मानसून पर निर्भर करती है।

यह भी पढ़ें - पाण्डु नदी उफनाई, नीचले इलाकों में पानी भरने से चलाई जा रही नावें

हि.स

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0