एक कोरोना संक्रमित मरीज पर कितना होता है खर्च ?

वैश्विक महामारी कोरोना से लोगों को बचाने के लिए और उन पर इलाज में हो रहे खर्च पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। इसके बाद भी कोरोना संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है...

एक कोरोना संक्रमित मरीज पर कितना होता है खर्च ?

वैश्विक महामारी कोरोना से लोगों को बचाने के लिए और उन पर इलाज में हो रहे खर्च पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। इसके बाद भी कोरोना संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश के 80 फीसदी से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में हो रहा है। कुछ प्राइवेट अस्पताल भी कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनके इलाज का खर्च सरकार वहन कर रही है या फिर जो सक्षम है वह खुद खर्च कर रहे  हैं। देश में इस समय इस बात पर बहस हुई है कि डब्ल्यूएचओ द्वारा दिए जा रहे धन का सरकारी अस्पतालों में दुरुपयोग किया जा रहा है, क्या आपने कभी सोचा है कि कोरोना के एक मरीज के इलाज पर लगभग कितना खर्च हो रहा है ? पैसा सरकार दे या मरीज खुद दे रहा हो लेकिन कोरोना से ठीक होने में कितना धन व्यय हो रहा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं...

किस मरीज के कोरोना इलाज में कितना खर्च आएगा वो कई बातों पर निर्भर करेगा, मसलन उसके शरीर में वायरस कितने गहरे तक फैला है, दूसरी क्या बीमारियां हैं, उम्र क्या है। हम ये मानकर चलते हैं कि एक सामान्य आदमी जिसे बाकी कोई दिक्कत नहीं है उसे कोरोना वायरस का संक्रमण हो गया है तो उस पर क्या खर्च होगा।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक सीनियर डॉक्टर के अनुसार कोरोना के एक सामान्य मरीज के इलाज पर औसतन 20 से 25 हजार रुपए रोजाना खर्च होता है ।अगर उसके इलाज में वेंटिलेटर या किसी जीवनरक्षक उपकरण का इस्तेमाल न हो। इसका मतलब यह हुआ कि 14 दिन के इलाज में एक मरीज पर 2 लाख 80 हजार से 3 लाख 50 हजार रुपए तक का खर्च आता है। आम तौर पर मरीज को तब डिस्चार्ज करके घर जाने की इजाजत दी जाती है जब उसका लगातार तीन से पांच कोरोना टेस्ट निगेटिव निकले। कुछ मरीजों में ये टेस्ट 8 से 10 बार तक करना पड़ता है।

कोरोना संदिग्ध लोगों का जो स्वैब टेस्ट होता है उसके एक टेस्ट का खर्च 4500 रुपए है जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस प्राइवेट लैब के लिए इस टेस्ट की अधिकतम राशि है। टेस्ट किट की ही कीमत 3000 रुपए है। अगर किसी आदमी में कोरोना के लक्षण दिखते हैं और उसका टेस्ट होता है तो उसे एंबुलेंस से ही लाया जाता है जिसका खर्च भी सरकार उठाती है। एक बार जब मरीज अस्पताल पहुंच जाता है तो उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा जाता है जिसके लिए एक खास निर्देश हैं। हर रूम का एक अलग टॉयलेट होना चाहिए, उस कमरे में कोई दूसरा बेड नहीं होना चाहिए, अगर मरीज उम्रदराज या दूसरी बीमारियां पहले से हैं तो फिर वहां वेंटिलेटर जरूरी है।

कुछ प्राइवेट अस्पताल वेंटिलेटर का एक दिन के लिए 25 हजार से 50 हजार रुपए तक चार्ज करते हैं। कमरे का किराया अस्पतालों पर निर्भर करता है लेकिन सबसे सस्ता भी हो तो वो 1000 से 1500 रुपए डेली का होता है। किसी भी कोविड हॉस्पिटल में 200 पीपीई किट्स की जरूरत डेली होती है क्योंकि डॉक्टर से लेकर नर्स तक को हर चार घंटे पर पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपेंट्स चेंज करने होते हैं।

अगर कोरोना वायरस का संक्रमण मरीज को बहुत ज्यादा है तो हेल्थ स्टाफ को पीपीई किट को और भी ज्यादा जल्दी चेंज करना होता है। एक पीपीई किट की कीमत 750 से 1000 रुपए है। दवाओं की जरूरत मरीज दर मरीज बदलती रहती है लेकिन कोरोना मरीजों के इलाज पर दिन भर में औसतन 500 रुपए से 1000 रुपए तक का खर्च सिर्फ दवा पर होता है। इसमें मरीज को मिलने वाले भोजन का खर्च शामिल नहीं है।

कोरोना के इलाज पर प्रति मरीज कितना खर्च आता है? आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं
​टेस्‍ट का खर्च
सबसे पहला खर्च टेस्‍ट किट से जुड़ा है. किट यह पता लगाने के लिए जरूरी है कि किसी को कोरोना है या महज सर्दी-जुखाम है. टेस्‍ट का खर्च करीब 4,500 रुपये बैठता है. इस पर सरकार सब्‍स‍िडी देती है. जिन लोगों के पास आयुष्‍मान भारत कार्ड है, उनके लिए यह मुफ्त है।

एक दिन में होने वाला खर्च
बिना वेंटिलेटर और आईसीयू के एक नॉन-क्र‍िटिकल कोविड-19 के मरीज के इलाज में रोजाना करीब 20,000 रुपये से 25,000 रुपये का खर्च आता है

​14 दिन में कितना होगा खर्च
एक मरीज को औसतन 14 दिन अस्‍पताल में रखा जाता है. यह क्‍वारंटीन के लिए अनिवार्य अवधि है. इस तरह करीब 2.8 से 3.5 लाख रुपये का खर्च आता है.।ऐसे मामलों में जहां वेंटिलेटर जरूरी होता है, वहां बिल काफी बढ़ जाता है. उन मामलों में रोजाना का खर्च करीब 25,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच आता है।बेशक अगर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है तो दवाओं पर कम से कम 1,000 रुपये का खर्च आता है।इन सभी खर्चों के अलावा मेनटिनेंस कॉस्‍ट शामिल होती है, इनमें अस्‍पताल के कमरे, मरीज के खाने, एंबुलेंस इत्‍यादि का खर्च शामिल है। 

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