IAS आईएएस बने बुन्देलीे बेटे की जन्मभूमि बनी कर्मभूमि

बुंदेलखंड क्षेत्र में कबरई जिला महोबा के एक साधारण परिवार में जन्मे एक किसान के बेटे जयेन्द्र कुमार यादव ने आईएएस बनकर जहां अपने माता-पिता के सपने को साकार किया है वही बुंदेलखंड को भी गौरवान्वित किया है।

IAS आईएएस बने बुन्देलीे बेटे की जन्मभूमि बनी कर्मभूमि

बुंदेलखंड क्षेत्र में कबरई जिला महोबा के एक साधारण परिवार में जन्मे एक किसान के बेटे जयेन्द्र कुमार यादव ने आईएएस बनकर जहां अपने माता-पिता के सपने को साकार किया है, वही बुंदेलखंड को भी गौरवान्वित किया है। बुंदेलखंड के इस बेटे को प्रषिक्षण के पश्चात बुंदेलखंड के ही जनपद जालौन में उप-जिलाअधिकारी के रूप में नियुक्ति मिली। यह क्षेत्र उनकी जन्मभूमि है जो आज उनकी कर्मभूमि बन गयी है। जयेन्द्र ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहते हैं की पढ़ाई के साथ-साथ नया हुनर सीखे और अपने आप को हर क्षेत्र में मजबूत बनाएं व बुराइयों से दूर रहें।

बुंदेलखंड न्यूज से खास बातचीत के दौरान आईएएस जयेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि बुंदेलखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, पहले की अपेक्षा यहां का किसान अब जागरूक हो रहा है। इसका उदाहरण मैं स्वयं हूं। मेरे किसान पिता ने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आईएएस बनूंगा, लेकिन शिक्षा के साथ-साथ जानकारी मिलती रहे और मेरा रुझान आईएएस की ओर बढता गया। मेरी मेहनत और लगन, माता-पिता के आशीर्वाद तथा गुरूजनों के मार्ग दर्षन से मुझे सफलता मिलती गई।

जयेन्द्र क्षेत्रवाद को गलत मानते हैं वह कहते हैं कि हमें राष्ट्र को सर्वोपरी रखकर राष्ट्रीय स्तर पर काम करना चाहिए और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है पलायन से प्रतिभाओं का समाप्त होती हैं। मेरा मानना है कि पलायन से प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। यदि आपके क्षेत्र में अगर आपके द्वारा निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवष्यक सुविधायें नहीं है तो आपको देश के दूसरे प्रांतों में जाना पड़ेगा। जहां आप के हुनर के मुताबिक आपको सफलता मिल सकती है।

बतातें चलें कि आईएएस जयेन्द्र कुमार यादव ने अपनी शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, महोबा से पूर्ण की है। उसके बाद उन्होंने आईआईटी बीएचयू से बी-टेक किया और 2018 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा को पास कर आईएएस बनें। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद प्रथम नियुक्ति कालपी तहसील मिलने उन्होंने ने महोबा जिले से अपने किसान माता-पिता को कालपी तहसील बुलाया, जहाँ पहुँच कर उन्होंने अपने बेटे जयेन्द्र कुमार यादव (आईएएस) को उप-जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठाया और अपना आशीर्वाद दिया।

बेटे को कुर्सी पर बैठा देखकर उनकी खुशी चेहरे पर छुपाए नही छिप रही थी। साधरण परिवार में जन्मे एक किसान के बेटे के माता-पिता के लिये यह बहुत ही गौरव का पल था। यूपी कैडर आईएएस  जयेन्द्र कुमार यादव बुन्देलखण्ड के युवाओं के लिये किसी आदर्श से कम नही है।
 

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