मालती बनाम आदि-गीता दिखाई देने वाला चुनाव बांदा में विकास के निर्णायक मोड़ पर

पूरे प्रदेश में नगर निकाय का चुनाव प्रचार चरम पर है। प्रत्याशियों के लिए जनता भगवान से भी बढ़कर....

मालती बनाम आदि-गीता दिखाई देने वाला चुनाव बांदा में विकास के निर्णायक मोड़ पर

पूरे प्रदेश में नगर निकाय का चुनाव प्रचार चरम पर है। प्रत्याशियों के लिए जनता भगवान से भी बढ़कर दिखाई दे रही है। कारण, कि उनके भाग्य का फेसला जनता को ही करना है, इसीलिए जनता के द्वार पर प्रत्याशी एक बार नहीं बल्कि कई कई बार जा रहे हैं। बुन्देलखण्ड के बांदा की नगर पालिका सीट भी विगत पांच सालों में काफी चर्चा में रही, इसीलिए ये सीट अन्य के मुकाबले काफी अहम हो जाती है, क्योंकि जिस प्रकार जनता ने देखा, पूरे पांच साल बांदा का विकास कार्य तो जैसे ठप्प ही पड़ गया था, उसकी बजाये एक दूसरे पर दोषारोपण, बर्खास्तगी, वाद-विवाद और एक दिन का चेयरमैन जैसी स्थितियां उत्पन्न हुईं।

यह भी पढ़े - भाई के तिलक में लाइसेंसी पिस्टल से फायरिंग करना महंगा पड़ा, जाना पड़ा जेल

निर्वतमान चेयरमैन मोहन साहू इसे सत्ता से संघर्ष का नाम देते हुए सपा का टिकट कट जाने के बावजूद भी दोबारा ले आने में कामयाब हुए। और जैसे ही प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार शुरू हुआ तो शुरूआती चार दिनों में बांदा नगर पालिका के निवर्तमान चेयरमैन मोहन साहू स्वयं ही घर-घर चुनाव प्रचार करते दिखाई दे रहे थे। पर विरोधी पक्ष ने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा प्रत्याशी मालती बासू स्वयं एक-एक घर जाकर स्वयं चुनाव प्रचार कर रही हैं, और उधर कांग्रेस प्रत्याशी आदिशक्ति दीक्षित भी एक-एक घर जाकर स्वयं चुनाव प्रचार कर रही हैं। तो ऐसे में सपा प्रत्याशी गीता मोहन साहू का स्वयं चुनाव प्रचार में न निकलकर सिर्फ अपने पति को ही चुनाव प्रचार में भेजना कहां तक उचित है। ये मामला तूल पकड़ता तो उसके पहले ही मोहन साहू ने इसकी गम्भीरता को समझकर अपनी पत्नी और सपा की प्रत्याशी गीता साहू को चुनावी मैदान में प्रचार के लिए उतार दिया। अब गीता मोहन साहू स्वयं और उनके पति मोहन साहू के साथ एक-एक गली, मोहल्ला घूमघूम कर अपने पति के पिछले कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए स्वयं के लिए इस बार वोट देने की अपील करती दिखाई दे रही हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी आदिशक्ति दीक्षित भी अपने पति राजेश दीक्षित जोकि कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं, के साथ बांदा नगर की गली-मोहल्लों में अपने आप को ज्यादा सशक्त उम्मीदवार साबित करने में जुटी हुई हैं। आदिशक्ति दीक्षित को भरोसा है कि उनके ब्राह्मण होने की वजह से नगर के ज्यादातर ब्राह्मण वोटों को वो अपने पक्ष में करके और कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी की बदौलत मुस्लिम वोटों को भी रिझाकर बांदा नगर पालिका की सीट पर कब्जा जमा सकती हैं। हालांकि उनके चुनाव प्रचार में कुछ ब्राह्मण नेताओं को भी देखा जा सकता है, जिससे ये समझ आता है कि शुरूआत भले ही धीमे हुई हो पर हो सकता है कि वोटिंग डेट आते आते उनके साथ ब्राह्मणों की एक बड़ी लॉबी जुट जाये। पर जानकार बताते हैं कि उनकी राह इतनी आसान भी नहीं है। उन्हें सफल होने के लिए अभी और भी मेहनत करनी होगी। क्योंकि उनके चुनाव प्रचार में जो कार्यकर्ताओं की संख्या दिखाई दे रही है, उससे ये नहीं लगता कि वो देश की एक सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी की उम्मीदवार हैं।

यह भी पढ़े - 8000 से अधिक विद्यार्थियों ने किया बुन्देलखण्ड प्रतिभा सम्मान परीक्षा में प्रतिभाग

बात अगर भाजपा प्रत्याशी मालती बासू की, की जाये तो उनके साथ कार्यकर्ताओं की पूरी फौज दिखाई देती है। मालती बासू के पति रामकिशुन बासू, जो शहर के प्रतिष्ठित मिष्ठान्न व्यापारी हैं, के साथ-साथ उनके दोनों बेटे अंकित और अभिनव भी अलग-अलग टोलियों में चुनाव प्रचार के लिए बड़े सवेरे से निकल जाते हैं, और देर रात तक उनका गली-गली, मोहल्लों-मोहल्लों में मतदाताओं को अपने पक्ष में करना और रणनीतियां बनाने का दौर चलता रहता है। भाजपा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह बताते हैं कि उनके यहां प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ता बल्कि पूरी भाजपा चुनाव लड़ती है और यही कारण है कि टिकट वितरण के पहले जो प्रतिद्वन्दी थे, वो प्रत्याशी घोषित होते ही आपसी मनमुटाव को भुलाकर अपने आपको स्वयं प्रत्याशी मानते हुए भाजपा को जिताने में लग जाते हैं। और यही उनकी जीत का आधार है। लेकिन इन बातों के अलावा भी भाजपा के पास कार्यकर्ताओं की लम्बी चौड़ी फौज है, जो एक आवाज लगाने पर शहर की सड़कों पर चुनाव प्रचार के लिए कूद पड़ती है। इसके साथ ही तमाम विरोधी दलों के बड़े बड़े जातीय नेता भी भाजपा की नाव पर सवार होकर चुनावी वैतरणी को पार करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

यह भी पढ़े - VIDEO : सुनिए क्या बोल रहे बांदा विधायक प्रकाश द्विवेदी प्रभावी मतदाता सम्मेलन में !

हालांकि प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार करने के लिए ज्यादा समय नहीं मिला। मात्र आधे महीने में अपने आपको जनता के बीच ले जाना वाकई कठिन होता है, पर जहां इतने कम समय में सपा, बसपा, कांग्रेस के लिए ये मुश्किल होता है तो वहीं भाजपा के लिए 7 दिन भी चुनाव प्रचार के लिए बहुत होते हैं, क्योंकि भाजपा का हर कार्यकर्ता चुनाव लड़ता है और भाजपा चुनाव के लिए हरदम तैयार रहती है, ये कहना है बांदा सदर के भाजपा विधायक प्रकाश द्विवेदी का। प्रकाश द्विवेदी इस बात को भी कहते हैं कि विगत पांच वर्षों में बांदा नगर पालिका का जो हाल हुआ है, वो बांदा की जनता से छिपा नहीं है, विकास के नाम पर केवल वाद-विवाद और राजनीतिक रोटियां सेंकते हुए अपने आपको मजबूर साबित करते रहने से बांदा की जनता पिछले अध्यक्ष को माफ नहीं करेगी। बांदा की जनता अब समझ चुकी है कि बांदा नगर का विकास केवल ट्रिपल इंजन की सरकार बनने से ही सम्भव है।

उधर मोहन साहू भी अपनी पत्नी की जीत के प्रति आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। मुस्लिम, यादव वोट के सहारे मोहन साहू को अपनी जाति और तमाम पिछड़ा वर्ग से भी उम्मीद है। मोहन साहू को ये भी भरोसा है कि बांदा की जनता के लिए वो जिस प्रकार सुबह शाम खड़े हो जाते थे, चाहे किसी के घर के आगे की सड़क हो, नाली हो या फिर सफाई व्यवस्था, लोगों ने अगर उनसे आस लगाई है तो वो स्वयं पहुंचकर उनकी समस्या का निराकरण करने में सबसे आगे रहे हैं। इसके अलावा मोहन साहू भाजपा के ऊपर भी आरोपों का अम्बार लगाते हुए ये कहते हैं कि अगर उन्हें काम करने दिया जाता तो वो पांच साल में बांदा को चमका चुके होते।

खैर, अब तो चुनाव परवान चढ़ रहा है, सभी प्रत्याशियों के वादों को जनता सुन रही है, मन बना रही है। लेकिन असली निष्कर्ष तब सामने आयेगा जब मतपेटियां खुलेंगी और उनसे उदय होगा किसी एक प्रत्याशी के भाग्य का।

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0