जीवन बचाओ वृक्ष लगाओ

जीवन बचाओ वृक्ष लगाओ

सौरभ द्विवेदी @ चित्रकूट

इस वक्त मौसम मे साफ अंतर दिख रहा है। पहले के मुताबिक मौसम बदलता जा रहा है। अब ऋतुओं के समय मे काफी अंतर दिख रहा है। एकाएक गर्मी और एकाएक बारिश होने लगती है, ठंड कभी कम तो कभी ज्यादा पड़ने लगती है। इसका सीधा मनुष्य की इम्यूनिटी पर पड़ा है और वहीं फसलों की पैदावार मे भी भारी अंतर आने से किसान की समृद्धि पर भी फर्क पड़ रहा है। बुंदेलखण्ड का किसान लगभग पंद्रह-बीस वर्ष से ऐसी आपदा का शिकार हो रहा है। अबकी बार पर्यावरण दिवस पर रिमझिम बारिश हुई , इस दिन खंड विकास अधिकारी ने वृक्षारोपण कर प्रकृति संदेश प्रदान किया है। 

क्षेत्र पंचायत मुख्यालय परिसर पहाड़ी मे पर्यावरण दिवस के दिन वृक्षारोपण किया गया। खंड विकास अधिकारी मानसिक रूप से इंसानियत व प्रकृति प्रेमी नजर आते हैं। उनके अनेक ऐसे काम प्रकाश मे आए हैं, जब उन्होंने लाकडाउन के समय गरीबों की व्यक्तिगत मदद की तो इस बार वृक्ष लगाकर पंचायत प्रतिनिधियों को बड़ा संदेश प्रदान किया। 

असल मे वृक्ष लगाने के बाद उनका पालन - पोषण करना आवश्यक होता है। वृक्षारोपण एक छोटा सा गड्ढा खोद कर किया जा सकता है परंतु वह वृक्ष तब मरने लगता है, जब समय समय पर उसकी देखभाल नहीं हो पाती है। इसलिए बात पालन-पोषण पर होनी चाहिए। एक पौधे के संरक्षण पर होनी चाहिए। 

इन्हीं बिंदुओं को लेकर श्री सिंह से हमारी चर्चा हुई। उन्होंने चर्चा के दौरान कहा कि जीवन बचाओ - वृक्ष लगाओ के भाव को सभी जानते हैं। यह सभी को पता है कि प्रकृति के संरक्षण मे ही मानव जीवन संरक्षित है। जितनी सुंदर प्रकृति होगी उतनी सुंदर जिंदगी होगी। मनुष्य की देह को प्राकृतिक फलों से ऊर्जा मिलती है। निरोगी काया के लिए अच्छा खान - पान प्रकृति ही प्रदान करती है। 

वह चिंतित हुए कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। यही वजह है कि प्राकृतिक आपदाओं का शिकार मनुष्य हो रहा है। इन आपदाओं से बचने के लिए प्रकृति का दोहन बंद करना होगा, इसमे पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका मुख्य है। गांव मे तालाब सहित तमाम ऐसा भूभाग है , जहाँ वृक्ष लगाए जा सकते हैं। इससे हरे - भरे गांव की परिकल्पना साकार होगी। 

उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की है कि इस बारिश के मौसम में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण होना चाहिए। पंचायत प्रतिनिधि इसको गंभीरता से लें तभी हमारी जिंदगी का भविष्य उज्ज्वल होगा अन्यथा प्रकृति और मनुष्य के संघर्ष मे अंततः मनुष्य की हार निश्चित है  यदि प्रकृति का दोहन नहीं बंद हुआ। 

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