पाकिस्तान की जेल में 12 साल कैद रहे रामबहादुर को देखते ही मां बाप की आंखें छलक पड़ी

12 साल पहले गायब हुआ बेटा पाकिस्तान की जेल में बंद रहा, 12 साल बाद जब रामबहादुर गुरुवार अपने गांव लौटा तो खुशी के..

पाकिस्तान की जेल में 12 साल कैद रहे रामबहादुर को देखते ही मां बाप की आंखें छलक पड़ी
राम बहादुर (Ram Bahadur)

12 साल पहले गायब हुआ बेटा पाकिस्तान की जेल में बंद रहा, 12 साल बाद जब रामबहादुर गुरुवार अपने गांव लौटा तो खुशी के कारण माता-पिता की आंखें छलक पड़ी।उन्होंने बिछडे कलेजे के टुकड़े को छाती से लगा लिया और फिर आंखों से आंसू बहने लगे, जिसे देखकर हर गांव वासी की आंखें भर आई। 

राम बहादुर (Ram Bahadur)

रामबहादुर को अमृतसर लेने गई टीम आज दोपहर बांदा लौटी। उसे घर ले जाने से पहले टीम  अतर्रा थाने ले गई और पूछताछ के बाद गांव लेकर पहुंची।उधर बरसों पहले बिछड़े बेटे की एक झलक पाने के लिए बुजुर्ग पिता गिल्ला और मां कुसमा पलके बिछाए बैठी थी।उनकी निगाह गांव में आने वाली गाड़ियों पर टिकी थी।छोटे भाई के बच्चे भी खुशी से चहक रहे थे और उसकी दोनों बहने भी भाई का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।

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इतना ही नहीं 12 वर्ष पहले गांव से गए राम बहादुर को देखने के लिए पूरा गांव उनके घर के पास जमा था।जैसे ही राम बहादुर गांव पहुंचा बुजुर्ग माता-पिता ने उसे सीने से लगा लिया। बहनों ने दी उसे हाथों हाथ लिया लेकिन परिजनों को उस समय निराशा हाथ लगी जब वह किसी को पहचान तक नहीं पाया।यहां तक की मां बाप को भी पहचान नहीं पाया।

राम बहादुर (Ram Bahadur)

जब उससे पूछा गया कि पाकिस्तान कैसे पहुंचा और पाकिस्तान में उसके साथ किस तरह का बर्ताव किया गया। तो वह कुछ भी बताने में असमर्थ रहा।कभी वह कहता था कि तीरतपुर गया था तो कभी झांसी का नाम लेता था।इस बारे में बताया जा रहा है कि वह पहले भी मानसिक रूप से विक्षिप्त था और इस समय भी उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। जिससे वह पाकिस्तान में कैसे रहा इस बारे में खास जानकारी नहीं दे दे पाया।

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बताते चलेंकि जिले के ग्राम पचोखर निवासी रामबहादुर फरवरी 2009 में घर से नरैनी जाने की बात कह साइकिल से निकले थे और लापता हो गए थे। जनवरी 2021 में लोकल इंटेलीजेंस यूनिट (एलआइयू) टीम ने उनके पाकिस्तान की लाहौर जेल में बंद होने सूचना दी थी। 30 अगस्त को पाकिस्तान से रिहा होकर अमृतसर में रेडक्रास सोसाइटी की देखरेख में होने की खबर मिली तो बूढ़ी मां कुसमा और पिता गिल्ला बेटे की झलक पाने को बेचैन हो गए।

राम बहादुर (Ram Bahadur)

आखिर सभी बाधाओं को पार करते हुए रामबहादुर अमृतसर से अपने घर आने के लिए बुधवार दोपहर 12.30 बजे टीम के साथ ट्रेन से चला और आज बांदा पहुंचा। बांदा से गई टीम में शामिल नायब तहसीलदार बबेरू अभिनव तिवारी व एसआइ सुधीर चौरसिया ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे अमृतसर के तहसीलदार जगदीप सिंह मित्तल व एसआइ संजीव कुमार ने कागजी कार्रवाई पूरी कर रामबहादुर को उन्हें सौंपा। नायब तहसीलदार ने बताया कि घर वापसी की आस में रामबहादुर के चेहरे पर उत्सुकता दिखाई पड़ रही थी।

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