प्रदेश में प्याज की खपत पूरी करेगा बुन्देलखण्ड

उत्तर प्रदेश में खपत होने वाली प्याज की भरपाई बुन्देलखण्ड के किसान करेंगे और बांदा का जल ग्राम जखनी प्याज उत्पादन में बुन्देलखण्ड का मॉडल बनेगा...

प्रदेश में प्याज की खपत पूरी करेगा बुन्देलखण्ड

  • यह तभी संभव है जब भंडारण की व्यवस्था हो

उत्तर प्रदेश में खपत होने वाली प्याज की भरपाई बुन्देलखण्ड के किसान करेंगे और बांदा का जल ग्राम जखनी प्याज उत्पादन में बुन्देलखण्ड का मॉडल बनेगा। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। वही किसानों की मांग है कि इसके लिए भंडारण की व्यवस्था होनी चाहिए।

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देश में प्याज की बढ़ती खपत और आसमान छू रहे दामों से आम आदमी के थाली से प्याज गायब हो रही है। इधर कुछ महीनों में प्याज की कीमत बढ़ कर 30 से 40 रुपये किलो तक पहुंच गई है। ऐसे में अगर बुन्देलखण्ड के किसान प्याज का उत्पादन करेंगे तो इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि बुन्देलखण्ड और उत्तर प्रदेश के लोगों को सस्ते दामों में प्याज मिल सकेगी।

जल संरक्षण के रूप में देश में मॉडल बन चुके जलगांव जखनी के किसानों ने प्याज उत्पादन में भी बाजी मारी है। जिससे आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में प्याज का उत्पादन बढ़ सकता है। इस गांव में 2615 लोगों की आबादी है, इसमें ढाई सौ किसान हैं जो कड़ी मेहनत करके फसलों का उत्पादन करते हैं। इसी वर्ष  40 किसानों ने 2000 कुंतल प्याज का उत्पादन किया है लेकिन लॉकडाउन के कारण किसान अपनी उपज को दिल्ली या लखनऊ नहीं ले जा सके और भंडारण की सुविधाएं न होने से वह प्याज का स्टॉक भी नहीं कर सके, इसलिए उन्होंने अपनी प्याज ओने पौने दाम में बेच दी। उन्हें प्रति किलो 5 रुपए नुकसान भी उठाना पड़ा है। इसके बाद भी किसानों के हौसले बुलंद हैं। उनका कहना है कि वह अगली बार कम से कम 4000 कुंतल  प्याज उगाएंगे।

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वहीं कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बुन्देलखण्ड को प्याज में आत्मनिर्भर बनाने के लिए जुटा है। यहां के कृषि विज्ञानियों का मानना है कि बुन्देलखण्ड के 7 जिलों में अभी करीब ढाई हजार हेक्टेयर में ही प्याज की खेती हो रही है। अधिकांश किसान रबी सीजन की प्याज का उत्पादन करते हैं लेकिन इस वर्ष इन सभी जिलों में 11000 हेक्टेयर में 600000 क्विंटल प्याज के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें बांदा में ही अकेले 600 हेक्टेयर में 36000 क्विंटल प्याज का उत्पादन होगा। उत्तर प्रदेश में वार्षिक 12 लाख टन प्याज की खपत होती है । इस समय बुन्देलखण्ड के किसानों को नई तकनीक से प्याज उगाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले 2 वर्षों में उत्तर प्रदेश में प्याज की खपत बुंदेलखंड से पूरी हो सकती है।

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कृषि विज्ञानियों की माने तो बुन्देलखण्ड में प्याज उत्पादन व भंडारण के लिए 2 वर्ष से शोध चल रहा है यदि यहां प्याज भंडारण की सुविधा किसानों को उपलब्ध कराई जाए तो प्रदेश में प्याज की किल्लत दूर हो सकती है। नई प्रजातियां विकसित कर किसानों को बारिश और जाड़े के मौसम में उत्पादन कराया जाएगा, इससे किसानों कि आय बढ़ेगी।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए और प्याज का उत्पादन बढ़ाने के लिए एक समय तत्कालीन जिलाधिकारी हीरा लाल ने यहां के किसानों को अन्य जनपदों में प्याज की पैदावार बढ़ाने के गुर सीखने के लिए भेजा था। वहां से जो किसान लौट के आये, उन्होंने यहां अपने उन्हीं अनुभवों को धरातल पर उतारते हुए प्याज की रिकाॅर्ड पैदावार की। जखनी जलग्राम के संयोजक उमाशंकर पाण्डेय इस बात को कहते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी हीरा लाल का आभार व्यक्त करना भी नहीं भूलते। कहते हैं कि उनके दिखाये मार्ग से आज यहां का किसान खुशहाली में जी रहा है।

उधर जखनी ग्राम के निवासी जलपुरुष उमाशंकर पांडे मानना है कि जखनी गांव के किसानों में कड़ी मेहनत करने की क्षमता है। जिनकी मेहनत की बदौलत ही जखनी को जल ग्राम का दर्जा मिला है। उन्होंने कहा कि प्याज भंडारण की सुविधा न होने के कारण ही इस बार किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। अगर सरकार इस क्षेत्र में भंडारण की व्यवस्था कराएं तो निश्चित ही प्याज का उत्पादन दोगुना  हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब नैफैड महाराष्ट्र में प्याज खरीद सकता है तो फिर इस इलाके में प्याज उगाने वाले किसानों का प्याज भी खरीदना चाहिए, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और धीरे-धीरे बुन्देलखण्ड के किसान आत्मनिर्भर बनेगा।

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इस संबंध में जिले के बागवानी अधिकारी परवेज खान ने बताया कि जनपद में 10 भंडारण केंद्रों के लिए मंजूरी दी गई थी लेकिन केवल चार का निर्माण किया गया है। इधर कृषि विश्वविद्यालय ने खरीफ के लिए एल-883 प्रजाति तैयार की है। इसमें प्रति हेक्टेयर उत्पादन 300 क्विंटल है। खरीफ में ही एग्री फाउंड डार्क रेड प्रजाति है, इसमें 250 क्विंटल व भीमा सुपर में 250 क्विंटल उत्पादित होगी। रबी सीजन में एनएचआरडीएफ 2, 3 व 4, एग्री फाउंड लाइट रेड, भीमा किरन प्रजाति हैं, जिनका उत्पादन 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। बुंदेलखंड के किसानों को इन शोधित प्रजातियों के प्याज के बीज दिल्ली की संस्था एनएचआरडीएफ उपलब्ध कराएगी। 
 

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