पहाडों में मजदूरों की मौत का कौन जिम्मेदार ? दो साल में इतने मजदूरों ने गंवाई जान

कबरई  पत्थरमंडी कबरई में खनन नियमावली को ताक पर रखकर पहाड़ों में खनन कार्य कराया जा रहा है। पहाड़ों के पट्टाधारक 200 से 300 फीट गहरी हो चुकी खदानों को और गहरा कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी...

पहाडों में मजदूरों की मौत का कौन जिम्मेदार ? दो साल में इतने मजदूरों ने गंवाई जान

महोबा कबरई  पत्थरमंडी कबरई में खनन नियमावली को ताक पर रखकर पहाड़ों में खनन कार्य कराया जा रहा है। पहाड़ों के पट्टाधारक 200 से 300 फीट गहरी हो चुकी खदानों को और गहरा कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी सब कुछ जानकर अनजान बने हैं। मानकों का पालन न होने और खनन के दौरान सुरक्षा के संसाधन न होने से मजदूरों की मौत हो रही हैं। ताजा घटना पत्थरमंडी कबरई के पहरा स्थित पहाड में हुई जहां मंगलवार को पहाड धसकने से चार मजदूरो की जान चली गई। 

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इनकी जा चुकी है जान
गहरा गांव के डिंगरा पहाड़ में 12 जून 2020 को आकाशीय बिजली चमकने से हुई ब्लास्टिंग में गांधीनगर कबरई निवासी बालचंद्र, बुद्घू व बालकिशन की मौत हो गई थी। 28 अक्तूबर 2020 को नई मंडी स्थित क्रशर प्लांट के पट्टे में फंसकर नंदराम साहू की पत्नी रामवती की मौत हुई थी। आठ जनवरी 2021 को पहरा के डिंगरा पहाड़ में छेद करते समय बच्चीलाल कुशवाहा की गिरकर मौत हो गई थी। उसका भाई मातादीन घायल हो गया था। जनवरी में ही मकरबई निवासी रामस्वरूप कुशवाहा के पुत्र संतू व उसी गांव के ईश्वरी की मकरबई पहाड़ में काम करते समय गिरने से जान चली गई थी। छह फरवरी को कानपुर रोड स्थित क्रशर प्लांट में हेल्पर राजकिशोर पाल की पट्टे में फंसकर मौत हो गई थी। झलकारीबाई स्थित घुरघुरु पहाड़ में काम कर रहे गांधीनगर निवासी चंदू कुशवाहा की पहाड़ में ब्लास्टिंग के लिए छेद करते समय 150 फीट गहरी खदान में गिरने से मौत हो गई।इधर मंगलवार को पहरा में पहाड धसकने से राममिलन, रामफूल, कुलदीप व प्रेमचंद्र की मौत हो गई।

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कैसे हुआ हादसा
उत्तर प्रदेश में पत्थर मंडी के नाम से चर्चित कबरई में यह हादसा हुआ है। बताया जा रहा है कि कबरई थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पहरा गांव में डीआरएस पहाड़ का पट्टा धनराज सिंह के नाम पर है। इस पहाड़ पर मंगलवार को एक दर्जन से अधिक मजदूर खनन कार्य पर लगे हुए थे। पहाड़ पर होने वाले विस्फोट के लिए मजदूरों द्वारा होल करने का काम किया जा रहा था। तभी अचानक पहाड़ का एक हिस्सा एक गहरी खदान में जा गिरा जैसे ही पहाड़ का हिस्सा गिरा मजदूरों में अफरातफरी मच गई। इससे पहले मजदूर कुछ समझ पाते अचानक गिरे पहाड़ के मलबे के नीचे कई मजदूर दब गए।

नियम व मानकों का नहीं किया जाता पालन
खनिज नियमावली के अनुसार पहाड़ों में खनन कार्य जल स्तर से कम गहराई तक होना चाहिए। यहां 200 से 300 फीट गहरी खदानों में खनन कार्य चल रहा है। पहाड़ों में खनन कार्य करने वाले श्रमिकों के सिर पर हेलमेट, कमर में सुरक्षा बेल्ट, पैरों में फुल जूते और ब्लास्टिंग का कार्य प्रशिक्षित श्रमिकों से कराए जाने का प्रावधान है, लेकिन नियम व मानकों का पालन नहीं किया जाता। इससे हादसे हो रहे हैं।
मुआवजे के रूप में लगाई जाती है रुपयों की बोली

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पट्टाधारकों की लापरवाही से आए दिन मजदूरों की मौत हो जाती है। पट्टाधारक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। इसका मुख्य कारण खनन कार्य के दौरान मजदूरों की मौत होने पर परिजनों को मुआवजे के रूप में रुपयों की बोली लगाई जाती है। मृतक के परिजनों को दस से 15 लाख रुपये देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता। दबाव के चलते गरीब श्रमिकों की आवाज दब जाती है। मंगलवार को भी हुई घटना में प्रत्येक मृतक के परिजनों को 14 से 16 लाख रुपये दिए जाने के लिए प्रयास चलते रहे। देर शाम तक किसी ने भी थाने में तहरीर नहीं दी।
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