एक साल पहले जज अर्पिता साहू को कोर्ट में किया गया था अपमानित

यूपी के बाराबंकी जिले में तैनात रही जूनियर डिवीजन जज अर्पिता साहू  को 1 साल पहले 7 अक्टूबर 2022 को भरी अदालत में अपमानित किया गया था। जिसे  जज ने फर्द एहकाम में दर्ज भी ...

एक साल पहले जज अर्पिता साहू को कोर्ट में किया गया था अपमानित

 यूपी के बाराबंकी जिले में तैनात रही जूनियर डिवीजन जज अर्पिता साहू  को 1 साल पहले 7 अक्टूबर 2022 को भरी अदालत में अपमानित किया गया था। जिसे  जज ने फर्द एहकाम में दर्ज भी किया था। इस अपमान भरी घटना को देखकर लगता है जैसे वाकई उनका मानसिक शोषण किया गया है।

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जनपद बांदा की बबेरू तहसील में तैनात सिविल जज अर्पिता साहू ने बाराबंकी जिले में तैनाती के दौरान 7 अक्टूबर 2022 की घटना को फर्द एहकाम में दर्ज किया है। इसके मुताबिक 11रू10 बजे मैं डैस अपना न्याय कार्य करने बैठी थी। तभी बार के महामंत्री रितेश कुमार मिश्रा वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन सिंह व अन्य पदाधिकारी, तमाम अधिवक्ता के साथ आए और न्यायालय कक्ष में आकर न्याय कार्य बाधित किया। इन अधिवक्ताओं ने मुझे धमकी दी कि आपको हमारा सपोर्ट नहीं करना है, दिमाग खराब है, सुधार नहीं रही हैं। जब मैंने बोला है तो क्यों डैस पर बैठकर फाइल देख रही हैं। जिला जज से और सीजीएम से शिकायत की है तो मुझे आश्वासन दिया गया है कि कोर्ट नंबर 14 में अर्पिता साहू बिल्कुल नहीं बैठेगी। तब कैसे बैठ गई। उन्हें डैस से उतारने के लिए मजबूर किया गया। इसके लिए अधिवक्ताओं ने बदतमीजी भी की।

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अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी की तुम्हारी कोर्ट का पूरी तरह से बायकाट कराया जाएगा। तुम काम नहीं कर पाओगी। इस लायक तुम्हें नहीं छोड़ेंगे। महिला अधिकारी हो सुधर जाओ और डैस से उतर जाओ। वरना आज तुम्हारे साथ अच्छा नहीं होगा। बहुत कुछ हो सकता है आज तुम्हारे साथ। तानाशाही और बेशर्मी से कोर्ट चलाने के लिए डैस पर बैठ जाती हो और आदेश पारित कर देती हो। जब हम डेली बाय काट कर रहे हैं तो तुम्हारी समझ में नहीं आ रहा है। इस दौरान अधिवक्ताओं ने मुर्दाबाद के नारे भी लगाए और न्यायालय का दरवाजा बंद कर लाइट बंद कर दी गई थी। इसके बाद भी महिला जज अपनी कुर्सी पर डटी रही। इस घटना का पूरा विवरण महिला जज ने जिला जज को भेजा था।इस तरह की एक घटना बानगी है। जिससे लगता है की जो पत्र उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा है उसमें निश्चित ही उनका दर्द छुपा है।
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